केला, तरबूज, कुसुम और चिया बनीं किसानों की पसंद, मालवा-निमाड़ में कृषि विविधीकरण से खुल रहे आय के नए रास्ते

मालवा-निमाड़
लंबे समय तक सोयाबीन और पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहे मालवा-निमाड़ में अब खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। किसान आय बढ़ाने और जोखिम कम करने के लिए फल, सब्जी, औषधीय और उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।

इंदौर संभाग की रबी 2025-26 समीक्षा और खरीफ 2026 की तैयारियों को लेकर आयोजित संभागीय समीक्षा बैठक में सामने आए जिला-वार प्रस्तुतिकरणों से स्पष्ट हुआ कि क्षेत्र में फसल विविधीकरण अब नीति और व्यवहार दोनों स्तरों पर गति पकड़ रहा है।

कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को कम मूल्य वाली फसलों के बजाय अधिक मूल्य वाली फसलों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि उद्यानिकी क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और इसका रकबा बढ़ाने की दिशा में योजनाबद्ध प्रयास किए जाने चाहिए। साथ ही वैज्ञानिक खेती, नई तकनीकों और कृषि नवाचारों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।

पारंपरिक फसलों से आगे बढ़ रहे किसान

आलीराजपुर : फलों और सब्जियों के नए क्लस्टर

आलीराजपुर में आम, सीताफल और पपीता जैसी फल फसलों का रकबा लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही भिंडी और टमाटर जैसी सब्जियों के उत्पादन को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। जिले में नए बागवानी क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जिससे अधिक किसानों को उन्नत खेती और बेहतर बाजार से जोड़ा जा सके।

झाबुआ : तरबूज से बनी नई पहचान
झाबुआ ने तरबूज उत्पादन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान स्थापित की है। बढ़ते उत्पादन और बेहतर विपणन व्यवस्था के कारण किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। तरबूज अब जिले की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल हो चुका है।

बड़वानी : केले से बढ़ रही समृद्धि
बड़वानी में केले की खेती किसानों के लिए लाभकारी व्यवसाय बन गई है। यहां उत्पादित केले की मांग देश के साथ-साथ विदेशों तक पहुंच रही है। इसके अलावा किसानों को मिलेट्स उत्पादन के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

खरगोन : सफेद मूसली बना आय का नया आधार
खरगोन में सफेद मूसली जैसी औषधीय फसल किसानों की आय का नया स्रोत बनकर उभरी है। वहीं हाईब्रिड मक्का उत्पादन को आधुनिक कृषि नवाचार के रूप में अपनाया जा रहा है, जिससे उत्पादकता और आमदनी दोनों में वृद्धि हो रही है।

खंडवा : चिया और कुसुम की बढ़ती खेती
खंडवा में चिया, कोदो और कुटकी जैसी फसलों का रकबा बढ़ रहा है। बाजार में अच्छे दाम मिलने से किसानों का इन फसलों की ओर रुझान बढ़ा है। साथ ही कुसुम की खेती को बढ़ावा देकर फसल विविधीकरण को नई दिशा दी जा रही है।

धार : ब्लूबेरी के साथ नए प्रयोग
धार जिले में ब्लूबेरी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। यह फसल क्षेत्र में उच्च मूल्य वाली बागवानी के नए प्रयोग के रूप में उभर रही है और किसानों के लिए नई संभावनाएं पैदा कर रही है।

बुरहानपुर : ड्रिप सिंचाई से बढ़ा मुनाफा
बुरहानपुर में ड्रिप सिंचाई तकनीक के माध्यम से केले की खेती को नई दिशा मिली है। पानी की बचत, बेहतर उत्पादन और कम लागत के कारण किसानों की शुद्ध आय में वृद्धि दर्ज की जा रही है।

सोयाबीन के विकल्पों पर बढ़ा जोर
बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त ने सोयाबीन के विकल्प के रूप में अरहर पूसा-16 के उत्पादन को बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने खेतों में केवल बीटी कपास पर निर्भर रहने के बजाय कपास की अन्य प्रजातियों को भी बढ़ावा देने के निर्देश दिए, ताकि कीट प्रकोप की समस्या को कम किया जा सके।

उन्होंने किसानों को जैविक खाद के उपयोग, मिट्टी परीक्षण और वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता बताई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसानों को समय पर बीज और उर्वरक उपलब्ध कराए जाएं तथा कृषि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जाए।

मालवा-निमाड़ में उभरता यह कृषि परिवर्तन संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में क्षेत्र की पहचान केवल सोयाबीन उत्पादक क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि विविध और उच्च मूल्य वाली फसलों के केंद्र के रूप में भी स्थापित हो सकती है।

 

 

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Source : Agency

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