'मनरेगा के बाद नोट से हटेंगे गांधी', केरल सांसद ने बताया मीटिंग का दावा

नई दिल्ली

बीते दिनों संसद के शीत सत्र में केंद्र सरकार ने वीबी-जी राम जी बिल पास करवा लिया. इस बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई है. यह बिल देश में रोजगार गारंटी स्कीम मनरेगा की जगह लेगा. सरकार का कहना है कि यह पूरी तरह से नया बिल है. वहीं विपक्ष का कहना है कि सरकार ने मनरेगा स्कीम से महात्मा गांधी का नाम हटाने के लिए यह कानून बनाया है. इसको लेकर जारी विवाद के बीच केरल से माकपा के सांसद जॉन ब्रिटास ने एक बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा कि सरकार मनरेगा के बाद अब नोट से भी महात्मा गांधी की तस्वीर हटाने की योजना बना रही है. इसके लिए एक हाई लेवल मीटिंग भी हो चुकी है.

माकपा के राज्यसभा सांसद ब्रिटास ने दावा किया है कि भले ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया इस बात को खारिज करे लेकिन भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार महात्मा गांधी की तस्वीर को भारतीय मुद्रा नोटों से हटाने की योजना बना रही है. ब्रिटास ने सोमवार को दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर हाई-लेवल बैठक पहले ही हो चुकी है, जिससे सरकार की सोच में बदलाव का संकेत मिलता है.

हाई लेवल मीटिंग होने का दावा

ब्रिटास ने कहा कि आधिकारिक इनकारों के बावजूद इस मुद्दे पर पहली दौर की उच्च स्तरीय चर्चा हो चुकी है. यह अब मेरा अनुमान नहीं है. गांधी को हमारी मुद्रा से हटाना राष्ट्र के प्रतीकों को फिर से लिखने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र गांधी की तस्वीर को भारत की संस्कृति को बेहतर प्रतिबिंबित करने वाले किसी अन्य प्रतीक से बदलने पर विचार कर रहा है, जिसमें भारत माता भी एक विकल्प है.

हालांकि सरकार के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि मुद्रा नोटों के डिजाइन पर निर्णय आरबीआई लेता है, जो केंद्र के साथ परामर्श में होता है. महात्मा गांधी की तस्वीर 1996 में सभी नोटों पर स्थायी रूप से आ गई थी, जब महात्मा गांधी सीरीज के नोट लॉन्च किए गए थे. 2022 में आरबीआई ने स्पष्ट रूप से खबरों को खारिज किया था, जिसमें दावा किया गया था कि गांधी की तस्वीर को रवींद्रनाथ टैगोर या एपीजे अब्दुल कलाम जैसे अन्य हस्तियों की तस्वीर से बदलने का प्रस्ताव है.
क्या है विवाद

यह मुद्दा फिर से सामने आया है, जब विपक्षी दलों ने सरकार द्वारा विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) बिल, 2025 पेश करने के बाद आपत्ति जताई. इस बिल में गांधी का नाम हटा दिया गया और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए. विपक्षी दलों ने सरकार पर राम के नाम का उपयोग कर योजना को राजनीतिक रंग देने और गांधी की विरासत मिटाने का प्रयास करने का आरोप लगाया है. उन्होंने यह भी चिंता व्यक्त की कि नया कानून मनरेगा के मुकाबले काफी है. मनरेगा दुनिया का सबसे बड़ा ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम है.

 

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Source : Agency

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