हाईकोर्ट के फैसले से MP में मचा हड़कंप, 13 हजार शिक्षकों की मेरिट सूची खारिज

जबलपुर 

 मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने  13 हजार 89 चयनित शिक्षकों की मेरिट लिस्ट रद्द कर दी है। प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 में 5 प्रतिशत बोनस अंक विवाद पर जस्टिस विशाल धगट की बेंच ने पूरी मेरिट लिस्ट को दोबारा तैयार करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने गैर-आरसीआई अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया से बाहर करने का भी आदेश दिया है।

मध्यप्रदेश के 13 हजार 89 शिक्षकों को बुधवार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 की कथित तौर पर बोनस अंक विवाद जबलपुर हाईकोर्ट तक पहुंच गया था। बुधवार को सुनवाई करते हुए जबलपुर हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल धगट की बेंच ने विवादित मेरिट लिस्ट को निरस्त कर दिया। साथ ही राज्य शासन और मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल को नए सिरे से मेरिट लिस्ट बनाने को कहा है। नई मेरिट लिस्ट बनने से दोबारा प्रक्रिया होगी और इसका असर मध्यप्रदेश के 13 हजार 89 चयनित शिक्षकों पर पड़ेगा।

कौन है गैर-आरसीआई अभ्यर्थी, जिन्हें करेंगे बाहर
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि जिनके पास आरसीआई (भारतीय पुनर्वास परिषद) से मान्यता प्राप्त विशेष शिक्षा डिप्लोमा नहीं है, उन्हें 5 प्रतिशत बोनस का लाभ नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने ऐसे सभी अपात्रों को चयन प्रक्रिया से बाहर करने के निर्देश राज्य शासन और कर्मचारी चयन मंडल को दिए हैं। कोर्ट का मानना है कि यदि गलत जानकारी देकर लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों को बाद में सुधार का अवसर दिया जाएगा तो यह ईमानदार अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा। कोर्ट ने अपने आदेश में तल्ख टिप्पणी करते हुए लिखा है कि यदि पकड़े जाने के बाद अभ्यर्थियों को अपने अंक कम कराने या नहीं वाला विकल्प चुनने की अनुमति दी जाती है तो यह सीधे बेईमानी को बढ़ावा देने जैसा हो जाएगा।

कहां से शुरू हुआ था विवाद
नरसिंहपुर निवासी सोनम अगरैया और अन्य उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। जिसमें सवाल उठाते हुए कहा था कि भर्ती नियमों के मुताबिक केवल आरसीआई से मान्यता प्राप्त 'विशेष शिक्षा डिप्लोमा' धारकों को ही 5 फीसदी बोनस अंक का लाभ दिया जाना था, लेकिन मेरिट सूची में करीब 14984 अभ्यर्थियों ने स्वयं को इसी श्रेणी में दर्शाकर बोनस अंक हासिल कर लिए। जबकि आरसीआई के आंकड़े कहते हैं कि मध्यप्रदेश में केवल 2194 कार्मिक और 3077 पेशेवर ही पंजीकृत हैं। यही विवाद का कारण बना।

हां लिखते ही मिल गए बोनस अंक
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में यह भी बताया कि
भर्ती प्रक्रिया के वक्त अभ्यर्थियों से न तो आरसीआई रजिस्ट्रेशन नंबर मांगा गया और न ही प्रमाण-पत्र। सिर्फ ऑनलाइन आवेदन में हां लिख देने से ही साफ्टवेयर के जरिए सीधे 5 प्रतिशत बोनस अंक दे दिए गए थे। खास बात यह है कि लोक शिक्षण संचालनालय ने पांच माह पहले ही चेतावनी दे दी थी कि इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का बोनस के लिए हां लिखा जाना संदिग्ध है। हालांकि तभी कोई ठोस कदम उठा लिए जाते तो आज मेरिट लिस्ट विवादों में नहीं रहती। इस पूरे प्रकरण में याचिकाकर्ता की तरफ से आलोक वागरेचा और विशाल बघेल ने पक्ष रखा था।

 

#teacher

Source : Agency

14 + 1 =

ANKUR PANDEY(Owner/Editor)

Email: [email protected]

Mobile: 9200444084

C.G Office Add: Khairagarh, Chhuikhadan Gandai, KHAIRAGARH, Chhattisgarh, India 491881