लोकमाता अहिल्याबाई: काशी में फिर से जाग रही ऐतिहासिक धरोहर की स्मृति

इंदौर
होलकर राजघराने की महान शासिका अहिल्याबाई होलकर अपने शासन के 200 साल बाद भी देशभर में कराये गए कल्याणकारी कार्यों को लेकर चर्चा में हैं. यही नहीं अब उनके द्वारा जीर्णोद्धार कराए गए काशी विश्वनाथ मंदिर पर बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में रिसर्च भी किया जा रहा है.

देश भर में कई मंदिरों का निर्माण और जीणोद्धार

इंदौर के होलकर राजघराने की पहली महिला शासिका अहिल्याबाई होलकर भारतीय इतिहास की गौरवशाली और महान परंपरा की विरासत रही हैं. उन्होंने अपने शासनकाल में ना केवल साहित्य संगीत कला और औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार किया बल्कि शिव भक्त होने के कारण उन्होंने देश के कई मंदिरों का निर्माण और जीणोद्धार और निर्माण कराया.

इनमें काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी, सोमनाथ मंदिर गुजरात, नीलकंठ महादेव मंदिर पेटलादेव शामिल हैं. इसके अलावा महेश्वर का किला, महेश्वर में घाटों का निर्माण देश के विभिन्न इलाकों में धर्मशालाओं का निर्माण कराया और दक्षिण भारत के तीर्थ स्थलों को विकसित किया.

अहिल्याबाई होलकर पर हो रही रिसर्च

1780 में देवी अहिल्याबाई होलकर ने काशी विश्वनाथ मंदिर की मरम्मत और उसका नवीनीकरण कराया था, जो आज भी देश और दुनिया भर में प्रसिद्ध है. हाल ही में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय द्वारा मंदिर के निर्माण में अहिल्याबाई होलकर के योगदान जैसे विषय पर रिसर्च भी की जा रही है. जिसके शोधार्थी इन दिनों इंदौर में शोध कार्य कर रहे हैं. 

रिसर्च के लिए काशी से इंदौर पहुंचे रजनीश दुबे बताते हैं कि "काशी विश्वनाथ मंदिर में अहिल्याबाई होलकर के योगदान पर रिसर्च के दौरान, इंदौर में उनका वैभव और विरासत देखते ही बनती है. राजवाड़ा, खासगी ट्रस्ट, लालबाग और सेंट्रल म्यूजियम से जो जानकारी प्राप्त की वह अद्भुत है."

देश-विदेश की यूनिवर्सिटी में हो चुकी रिसर्च

देवी अहिल्याबाई होलकर से जुड़े सबसे समृद्ध म्यूजियम के संचालक और इतिहासकार जफर अंसारी बताते हैं कि "न केवल भारत में बल्कि कैंब्रिज यूनिवर्सिटी और अन्य स्थान के शोधार्थी भी अलग-अलग विषयों पर अहिल्याबाई होलकर पर रिसर्च कर चुके हैं. अब बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में रिसर्च के चलते उनके द्वारा जानकारी उपलब्ध कराई गई है.

इतनी बड़ी शख्सियत का अलग से संग्रहालय और ऐतिहासिक विरासत का एक स्थल होना चाहिए, जो फिलहाल नहीं है." हालांकि इसके बावजूद मैं खुद होलकर राजघराने के इतिहास और तमाम घटनाओं के प्रमाण और दस्तावेज की विरासत एकत्र करके संभालने में जुटे हैं.

कई रिसर्च पेपर भी हो चुके हैं प्रकाशित

अहिल्याबाई होलकर पर इसके पहले शोधार्थी विनोद समकुमार, डॉ मधुकर पाटील, विक्रम पाटील और शिवचरण कोत्टेवार समेत कई लोग रिसर्च कर चुके हैं. जिनके राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रिसर्च पेपर प्रकाशित हो चुके हैं. हालांकि अब बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में देवी अहिल्याबाई होलकर के धार्मिक योगदान और उनकी विरासत को लेकर हो रही रिसर्च भी संग्रहणीय दस्तावेज होगा.

 

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Source : Agency

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