मोदी डिग्री केस फिर चर्चा में, कोर्ट ने कहा – DU तीन हफ्ते में रखें अपना पक्ष

नई दिल्ली 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। दिल्ली हाई कोर्ट(Delhi High Court) ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) को निर्देश दिया है कि वह अपील में देरी माफ करने की अर्जी पर अपना जवाब (ऑब्जेक्शन) तीन सप्ताह के भीतर दाखिल करे। यह मामला सूचना आयोग (CIC) के वर्ष 2016 के आदेश से जुड़ा है, जिसमें आयोग ने प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री की जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश दिया था। इस आदेश को DU और गुजरात यूनिवर्सिटी दोनों ने अदालत में चुनौती दी थी।

हाई कोर्ट में दाखिल अपीलों में विश्वविद्यालयों ने यह तर्क दिया है कि प्रधानमंत्री की शैक्षणिक जानकारी सार्वजनिक करने से निजता का उल्लंघन हो सकता है। वहीं, सूचना के अधिकार (RTI) कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह जानकारी सार्वजनिक हित से जुड़ी है, इसलिए इसे जनता के सामने रखा जाना चाहिए। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि पहले देरी माफी से जुड़ी अर्जी पर विश्वविद्यालय की प्रतिक्रिया प्राप्त की जाएगी, जिसके बाद ही आगे की सुनवाई तय होगी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद तय की है।

कोर्ट ने DU को लगाई फटकार
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने मामले की सुनवाई की। अपीलकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट शादान फरासत ने दो प्रमुख मुद्दे उठाए पहला, क्या RTI एक्ट की धारा 8 के तहत किसी व्यक्ति की डिग्री संबंधी जानकारी को गोपनीय रखा जा सकता है। दूसरा, क्या प्रधानमंत्री की शैक्षणिक जानकारी को सार्वजनिक करना बड़े जनहित में आता है। सुनवाई के दौरान अदालत ने नोट किया कि अपीलें देरी से दाखिल की गई हैं। DU की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वे देरी और मामले की योग्यता, दोनों पर विस्तृत जवाब दाखिल करेंगे। बेंच ने निर्देश दिया “ऑब्जेक्शन दाखिल करें।” कोर्ट ने अपीलकर्ताओं को जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 16 जनवरी 2026 को निर्धारित की गई है।

सिंगल जज ने क्यों पलटा CIC का आदेश?
25 अगस्त 2024 को जस्टिस सचिन दत्ता ने CIC के उस आदेश को रद्द कर दिया था। उन्होंने कहा था कि किसी व्यक्ति की डिग्री और मार्कशीट व्यक्तिगत जानकारी हैं, जिन्हें RTI अधिनियम की धारा 8(1)(j) के तहत संरक्षित रखा जाता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना किसी बड़े जनहित के ऐसे दस्तावेजों का खुलासा नहीं किया जा सकता, क्योंकि विश्वविद्यालय और छात्र के बीच का रिश्ता विश्वास पर आधारित होता है। थर्ड पार्टी को यह रिकॉर्ड दिखाना गोपनीयता का उल्लंघन माना जाएगा। अब ताजा सुनवाई में चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने मामले पर विचार किया।

कौन है अपीलकर्ता?
इस मामले में आप (AAP) नेता संजय सिंह, RTI कार्यकर्ता नीरज शर्मा और एडवोकेट मोहम्मद इरशाद अपीलकर्ता हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि क्या सीबीएसई (CBSE) इस मामले में पक्षकार है, क्योंकि एक संबंधित याचिका में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की 10वीं और 12वीं कक्षा की मार्कशीट की जानकारी मांगी गई थी। अपीलकर्ताओं ने अदालत को स्पष्ट किया कि इस अपील में CBSE पक्षकार नहीं है।

 

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Source : Agency

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