उज्जैन में चौड़ीकरण के विरोध में पोस्टर वॉर, 'विकास' नहीं 'विनाश' के खिलाफ नारे

 उज्जैन

मध्य प्रदेश में बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन इन दिनों विकास और जन-आक्रोश के दोराहे पर खड़ी है। उज्जैन में इन दिनों सिंहस्थ 2028 को लेकर कई विकास कार्य किए जा रहे हैं जिसमें सड़क चौड़ीकरण के साथ क्षिप्रा नदी के घाटों पर भी निर्माण कार्य चल रहा है। हालांकि सड़क चौड़ीकरण के रास्ते में आ रही कॉलोनी के मार्ग के आसपास बसे 200 घरों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। यहां MR-4 मार्ग चौड़ीकरण के प्रशासन के 24 मीटर वाले फॉर्मूले के खिलाफ 'पोस्टर वॉर' शुरू हो गया है। 190 परिवार सड़क पर उतर गए हैं और घरों की दीवारों पर दर्द भरे पोस्टर चस्पा कर दिए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हम विकास से नहीं विनाश के खिलाफ सड़क पर उतरे हैं। उन्होंने घर की दीवारों पर पोस्टर लगाकर प्रभावित परिवारों के लिए सरकार से राहत की गुहार लगाई है। प्रभावित परिवारों ने अब जनप्रतिनिधियों और शासन से मानवीय आधार पर हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए 15 मीटर के समझौते को स्वीकार करता है या फिर विकास का पहिया इन आशियानों के ऊपर से होकर गुजरता है।
आर-पार की लड़ाई का ऐलान

उज्जैन शहर में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच प्रशासन द्वारा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए चलाए जा रहे MR-4 मार्ग चौड़ीकरण अभियान ने अब एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। मामला MR-5 मार्ग का है, जहां राणकेश्वर धाम से गाड़ी अड्डा और क्षिप्रा नदी के बड़े पुल तक होने वाले निर्माण ने दारू गोदाम, अमर नगर और प्रीति नगर के निवासियों की रातों की नींद उड़ा दी है। प्रशासन जहां इस मार्ग को 24 मीटर चौड़ा करने की योजना पर अडिग है, वहीं स्थानीय रहवासियों ने इस प्रस्ताव के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। विरोध का आलम यह है कि क्षेत्र की गलियों में अब सन्नाटे के बजाय नारों और पोस्टरों की गूंज है। दुकानों और घरों के बाहर चस्पा किए गए पोस्टरों पर लिखा है, "हम विकास के नहीं, विनाश के खिलाफ" हैं।
महिलाओं और बुजुर्गों की आंखों में आंसू

अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी से घर बनाने वाली महिलाओं और बुजुर्गों की आंखों में आंसू हैं। एक स्थानीय महिला ने रोते हुए अपनी पीड़ा व्यक्त की कि "हमने अपनी गाढ़ी कमाई इन मकानों में लगा दी है, अगर ये टूट गए तो हम सड़क पर आ जाएंगे। हम विकास चाहते हैं, लेकिन अपनों की बर्बादी की कीमत पर नहीं।"
क्या है मामला

वर्तमान में इस प्रस्तावित मार्ग के अलग-अलग हिस्सों में 15, 18 और 24 मीटर चौड़ाई तय की गई है, जिसे लेकर भ्रम और भय की स्थिति बनी हुई है।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि वे सिंहस्थ के महत्व को समझते हैं और विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर घरों को पूरी तरह जमींदोज करना न्यायसंगत नहीं है।

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने स्पष्ट किया कि वे 15 मीटर चौड़ीकरण के लिए सहर्ष तैयार हैं, जिससे मार्ग भी सुगम होगा और लोगों के आशियाने भी बच सकेंगे। लोगों का तर्क है कि यदि 24 मीटर का पैमाना लागू हुआ, तो लगभग 150 से 200 परिवार पूरी तरह बेघर हो जाएंगे।

 

 

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Source : Agency

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