ईरान पर ट्रंप का नया दांव! मिडिल ईस्ट में 50 और फाइटर जेट तैनात, बढ़ा क्षेत्रीय तनाव

न्यूयॉर्क
   ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में अमेरिका ने अपनी हवाई ताकत तेजी से बढ़ा दी है. CENTCOM क्षेत्र यानी मिडिल ईस्ट में 50 से ज्यादा अतिरिक्त फाइटर जेट भेजे गए हैं. यह कदम ईरान पर हमलों को और तेज करने और क्षेत्र में तनाव बढ़ने की तैयारी का संकेत देता है. अमेरिका अब ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता को और कमजोर करने के लिए बड़े पैमाने पर हवाई अभियान चला सकता है। 

कौन से जेट और कहां से भेजे गए?

अमेरिका ने यूरोप से कई एयर बेस से जेट तैनात किए...

    आरएफ लेकेनहेथ से 15 F-35A और 12 F-15
    एवयानो एयर बेस से 12 F-16
    स्पैंगडाहलेम एयर बेस से 12 F-16

न्यूयॉर्क टाइम्स ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि जर्मनी से F-16 और ब्रिटेन से F-35 भी भेजे जा रहे हैं. साथ में एरियल रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट भी भेजे गए, जो लंबी दूरी के हमलों के लिए जरूरी हैं। 

ये तैनातियां शुक्रवार को जॉर्डन में ईरानी हमले से पहले शुरू हुई थीं. CENTCOM ने इन तैनातियों पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन यह स्पष्ट है कि अमेरिका क्षेत्र में अपनी हवाई श्रेष्ठता सुनिश्चित करना चाहता है। 

क्यों बढ़ा रहा है अमेरिका हवाई ताकत?
ईरान युद्ध अब नौवीं रात तक पहुंच चुका है. अमेरिका ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमलों और मिसाइल हमलों को रोकना चाहता है. ईरान ने जॉर्डन, कतर, बहरीन जैसे देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए. इनमें अमेरिकी सैनिकों के मारे गए और घायल हुए। 

अमेरिका की यह तैनाती डिटरेंस की रणनीति है. F-35 जैसी स्टेल्थ जेट्स दुश्मन के राडार से बचकर हमला कर सकती हैं, जबकि F-15 और F-16 हमले और डिफेंस के लिए मजबूत हैं. एरियल रिफ्यूलिंग विमान इन जेट्स को लंबे समय तक उड़ान भरने में मदद करेंगे। 

अमेरिका ईरान पर और सटीक हमले करने की तैयारी कर रहा है. इससे पहले भी अमेरिका ने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल साइटों, कमांड सेंटर और बंदरगाहों पर हमले किए. अब ज्यादा जेट्स से हवाई हमलों की संख्या और तीव्रता बढ़ सकती है। 

मिडिल ईस्ट में यह बढ़ती तैनाती पूरे क्षेत्र को प्रभावित कर रही है. जॉर्डन में पहले ही अमेरिकी बेस निशाने पर आए. कतर के अल उदेद बेस और बहरीन की सुविधाएं भी प्रभावित हुईं. ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों से जवाब दिया, लेकिन अमेरिका की हवाई श्रेष्ठता उसे मुश्किल में डाल रही है। 

ईरान का दावा है कि उसके पास अभी भी काफी मिसाइल स्टॉक बचा है. लेकिन लगातार अमेरिकी हमलों से उसके बुनियादी ढांचे – पुल, पानी के प्लांट, तेल निर्यात केंद्र को नुकसान पहुंचा है. होर्मुज में तेल जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक तेल कीमतें बढ़ रही हैं। 

आगे क्या होने वाला है?
रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह तैनाती सिर्फ बचाव नहीं, बल्कि आक्रामक रुख है. F-35 और F-15 जैसे एडवांस जेट्स ईरान की एयर डिफेंस को भेद सकती हैं. इससे ईरान पर दबाव बढ़ेगा और वह होर्मुज में अपनी रणनीति बदल सकता है। 

दूसरी तरफ, ईरान ड्रोन-मिसाइल पर भरोसा कर रहा है. जॉर्डन हमला इसका उदाहरण है. लेकिन अमेरिका की बढ़ती हवाई ताकत के सामने ईरान को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. यह तैनाती क्षेत्रीय सहयोगी देशों – जॉर्डन, सऊदी अरब, यूएई को सुरक्षा देती है. लेकिन पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से युद्ध फैलने का खतरा है। 

 

#fighter jet

Source : Agency

13 + 7 =

ANKUR PANDEY(Owner/Editor)

Email: [email protected]

Mobile: 9200444084

C.G Office Add: Khairagarh, Chhuikhadan Gandai, KHAIRAGARH, Chhattisgarh, India 491881